माता सीता को वन में छोड़ना (Laxman And Mata Sita In Hindi) | रामायण: लक्ष्मण का जीवन परिचय (भाग 3)

रामायण: लक्ष्मण का जीवन परिचय (भाग 3)

 तीन भागों में....  भाग 3

माता सीता को वन में छोड़ना (Laxman And Mata Sita In Hindi) 

माता सीता को वन में छोड़ना (Laxman And Mata Sita In Hindi)


चौदह वर्ष के वनवास के पश्चात तीनो पुनः अयोध्या आ गए व श्रीराम का राज्याभिषेक हो गया। कुछ दिनों के बाद ऐसी घटना घटित हुई कि श्रीराम को माता सीता का त्याग करना पड़ा तथा उन्हें वन में छोड़कर आने का उत्तरदायित्व लक्ष्मण को ही मिला।

लक्ष्मण भारी मन से अपनी माता समान भाभी सीता को रथ पर लेकर वन की ओर निकल पड़े तथा वाल्मीकि आश्रम के पास पहुँच गए। वहां पहुंचकर लक्ष्मण जोर-जोर से रोने लगे थे और माता सीता के साथ ही वन में जाने की जिद्द करने लगे। उन्होंने जीवनभर माता सीता की एक पुत्र की भांति सेवा करने को कहा।

तब माता सीता ने लक्ष्मण रेखा की भांति सीता रेखा खिंची तथा लक्ष्मण को उस रेखा को पार न करने का आदेश दिया तथा वहां से चली गयी। लक्ष्मण अत्यंत प्रलाप करते हुए पुनः अयोध्या आ गए।

लक्ष्मण का समाधि लेना (Lakshman Ki Mrityu Kaise Hui)


समय के साथ-साथ लक्ष्मण ने बहुत कुछ देखा जैसे कि भगवान श्रीराम का माता सीता के विरह में जीवन, अश्वमेघ यज्ञ, लव-कुश से युद्ध, अपने दो पुत्रों अंगद व चंद्रकेतु का जन्म, माता सीता का भूमि में समाना व श्रीराम का अपने पुत्रों लव-कुश को अपनाना इत्यादि।

जब श्रीराम का धरती त्यागकर पुनः वैकुण्ठ जाने का समय आ गया तो उनके जाने से पहले लक्ष्मण को वहां भेजना आवश्यक था। एक दिन यमराज ऋषि के भेष में श्रीराम से मिलने आए। तब श्रीराम ने ऋषि के कहेनुसार लक्ष्मण को द्वार पर प्रहरा देने को कहा तथा किसी के भी अंदर आने पर उसे मृत्युदंड (Shri Ram Ne Lakshman Ko Mrityudand Kyu Diya) देने की घोषणा की।

जब लक्ष्मण द्वार पर प्रहरा दे रहे थे तो ऋषि दुर्वासा वहां आ गए व उसी समय श्रीराम से मिलने की जिद्द करने लगे अन्यथा अयोध्या नगरी को अपने श्राप से भस्म करने की चेतावनी देने लगे। इस पर लक्ष्मण ने सोचा कि केवल उनके प्राण दे देने से अयोध्यावासियों के प्राण बच सकते है (Lakshman Ka Tyag Ramayan) तो वे अपने प्राण दे देगे।

यह सोचकर लक्ष्मण श्रीराम की आज्ञा के विरुद्ध उनके कक्ष में गए व ऋषि दुर्वासा के आने की सूचना दी। लक्ष्मण को कक्ष में देखते ही यमराज वहां से चले गए व श्रीराम ने अपने आज्ञा की अवहेलना होने पर मंत्रणा बुलायी। उस मंत्रणा में लक्ष्मण को मृत्युदंड दिए जाने की चर्चा हो रही थी कि तभी हनुमान ने लक्ष्मण का त्याग (Lakshman Ka Parityag Ramayan In Hindi) करने का सुझाव दिया। शास्त्रों के अनुसार किसी सज्जन व्यक्ति का त्याग करना उसे मृत्युदंड देने के ही समान होता है, इसलिये यह सुझाव सभी को पसंद आया। फलस्वरूप भगवान श्रीराम ने लक्ष्मण का हमेशा के लिए त्याग (How Laxman Died In Hindi) कर दिया।

सरयू नदी में जाकर समाधि


अपने भाई श्रीराम के द्वारा त्याग किए जाने पर लक्ष्मण को अपने जीने का कोई औचित्य नही दिखाई दिया। इसलिये उन्होंने अयोध्या के निकट सरयू नदी में जाकर समाधि ले ली (Death Of Laxman In Ramayan In Hindi) व वापस अपने धाम वैकुण्ठ लौट गए। उनके जाने के कुछ दिनों के पश्चात ही श्रीराम ने भी उसी नदी में समाधि ले ली व वैकुण्ठ पहुँच गए।

!! जय श्री राम!!
रामायण संगीत , कर्म  का  दर्शन  प्यारा।
धर्म ध्वजा को गगन, सत्य की रसमय धारा।
!! जय श्रीराम वंदन अभिनंदन आदर सत्कार अभिनंदन सुस्वागतम भरामायण: लक्ष्मण का जीवन परिचय


जय श्री राम




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